आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "Duubte"
नज़्म के संबंधित परिणाम "Duubte"
नज़्म
मेरे कान में ये नवा-ए-हज़ीं यूँ थी जैसे
किसी डूबते शख़्स को ज़ेर-ऐ-गिर्दाब कोई पुकारे!
नून मीम राशिद
नज़्म
उफ़ुक़ पे डूबते दिन की झपकती हैं आँखें
ख़मोश सोज़-ए-दरूँ से सुलग रही है ये शाम!
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मेरे ज़र्रे ज़र्रे से तुम्हें नोच रहा है
और उदासी डूबते सूरज की आख़िरी किरन बन कर