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नज़्म
इक़बाल सुहैल
नज़्म
यही दस बीस अगर हैं कुश्तागान-ए-ख़ंजर-अंदाज़ी
तो मुझ को सुस्ती-ए-बाज़ू-ए-क़ातिल की शिकायत है
शिबली नोमानी
नज़्म
हिलाल-ए-'ईद को क्यों ख़ंजर-ए-नाज़-ओ-अदा कहिए
बुरा क्या है जो मेहराब-ए-जबीन-ए-दिल-रुबा कहिए
अहसन अहमद अश्क
नज़्म
ख़ुशनुमा शहरों का बानी राज़-ए-फ़ितरत का सुराग़
ख़ानदान-ए-तेग़-ए-जौहर-दार का चश्म-ओ-चराग़
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हमारे शेरों में मक़्तल के इस्तिआरे हैं
हमारे ग़ज़लों ने देखा है कूचा-ए-क़ातिल