आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "KHanjar-e-qaatil"
नज़्म के संबंधित परिणाम "KHanjar-e-qaatil"
नज़्म
इक़बाल सुहैल
नज़्म
तेरी आँखों में हैं ग़लताँ वो शक़ावत के शरार
जिन के आगे ख़ंजर-ए-चंगेज़ की मुड़ती है धार
जोश मलीहाबादी
नज़्म
इस मोहब्बत को परस्तिश से बदलना भूल है
ये तक़ाज़ा ये तवाज़ुन इस दिल-ए-कामिल में है
अख़्तर हुसैन शाफ़ी
नज़्म
अमाँ कैसी कि मौज-ए-ख़ूँ अभी सर से नहीं गुज़री
गुज़र जाए तो शायद बाज़ू-ए-क़ातिल ठहर जाए