आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "KHanjar-e-qaatil"
नज़्म के संबंधित परिणाम "KHanjar-e-qaatil"
नज़्म
इक़बाल सुहैल
नज़्म
जो नफ़स है हदफ़-ए-दशना-ए-क़ातिल है अभी
दिल के हर ज़ख़्म से रिसता है उमीदों का लहू
क़ैसर-उल जाफ़री
नज़्म
यही दस बीस अगर हैं कुश्तागान-ए-ख़ंजर-अंदाज़ी
तो मुझ को सुस्ती-ए-बाज़ू-ए-क़ातिल की शिकायत है
शिबली नोमानी
नज़्म
हमारे शेरों में मक़्तल के इस्तिआरे हैं
हमारे ग़ज़लों ने देखा है कूचा-ए-क़ातिल
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
नज़्म
तेरी आँखों में हैं ग़लताँ वो शक़ावत के शरार
जिन के आगे ख़ंजर-ए-चंगेज़ की मुड़ती है धार
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हिलाल-ए-'ईद को क्यों ख़ंजर-ए-नाज़-ओ-अदा कहिए
बुरा क्या है जो मेहराब-ए-जबीन-ए-दिल-रुबा कहिए
अहसन अहमद अश्क
नज़्म
इस मोहब्बत को परस्तिश से बदलना भूल है
ये तक़ाज़ा ये तवाज़ुन इस दिल-ए-कामिल में है