aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "KHaslat"
इस कुत्ते की ख़सलत क्या हैबियातर्चे की याद में भूँक रहा है
साँपों की ये ख़सलतमालिक-ए-जिंन-ओ-इन्स की, इंसानों के हक़ में
मगर उन की ख़सलत है अपनों से लड़नाकि कुत्तों पे ख़ुद ग़ुरग़ुराते हैं कुत्ते
मगर कहती नहीं कुछ भी ज़बाँ सेहै यही औरत की ख़सलत
ये जो बौने ख़ुदा बने हैं अजीब शय से जो लग रहे हैंहैं दर-हक़ीक़त ये आदमी ही बस उन की ख़सलत जुदा है थोड़ी
मालूम नहीं आप को ये नुक्ता-ए-तारीख़जो क़ौम की ख़सलत है न ही रेल की ख़सलत
अकेला न था बीवी बच्चे भी थेजो थे सब के सब नेक ख़सलत बड़े
एक शहीद चिनार के पहलू से बाहर को निकलाइक ख़ुश-ख़सलत
किजंगली दरिंदे भी अपनी ख़सलत भूल गए हैं
चोला बदलने सेख़सलत नहीं बदलती लोगो
ये आग अब जिबिल्लत की तरतीब का लाज़िमा हैबहीमाना ख़सलत को तस्कीन देता हुआ एक उंसुर
इक टाँग अपनी जब उठा करहस्ब-ए-ख़स्लत कर गया
फिर ब-तदरीज बदलने लगी ख़सलत इस कीअब तो ख़ुद मुझ पे मुसल्लत है शरारत इस की
ख़स ओ ख़ाशाक से होता है गुलिस्ताँ ख़ालीगुल-बर-अंदाज़ है ख़ून-ए-शोहदा की लाली
हो हाथ का सिरहाना सब्ज़े का हो बिछौनाशरमाए जिस से जल्वत ख़ल्वत में वो अदा हो
ता-ब-कै गिर्द तिरे वहम ओ तअ'य्युन का हिसारकौंद कर मज्लिस-ए-ख़ल्वत से निकलना है तुझे
ख़ल्वत में भी हो जल्वत का समाँ वहदत को दुई से शाद करें
मिरे नाला-ए-नीम-शब का नियाज़मिरी ख़ल्वत ओ अंजुमन का गुदाज़
कटड़ियों और गलियों मोहल्लों के नामजिन की नापाक ख़ाशाक से चाँद रातों
कुछ भी न रहा जब बिकने को जिस्मों की तिजारत होने लगीख़ल्वत में भी जो ममनूअ' थी वो जल्वत में जसारत होने लगी
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