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नज़्म
ग़ज़लों के ऐ शहंशाह 'मीर'-ए-जहान-ए-उर्दू
बाक़ी नहीं जहाँ में नाम-ओ-निशान-ए-उर्दू
मोहम्मद ओवैस ख़ाँ
नज़्म
है बहर-ए-इल्म तेरी रवानी से सर-बसर
दामान-ओ-जेब-ए-उर्दू-ओ-हिन्दी हैं पुर-गुहर
रंगेशवर दयाल सक्सेना सूफ़ी
नज़्म
मसअला ख़िदमत-ए-उर्दू का भी था पेश-ए-नज़र
अपने अशआ'र की अज़्मत से भी वाक़िफ़ थे मगर
कैफ़ अहमद सिद्दीकी
नज़्म
रहबर जौनपूरी
नज़्म
गई ये चीन-ओ-जापान और गई यूरोप के मुल्कों में
रहा जो चंद दिन हिन्द में हुई उस की ज़बाँ उर्दू