aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aGvaa"
दहशतें जन्नत में ले आएँगे पाकिस्तान सेहूर को इग़वा करा लेंगे किसी ग़िलमान से
उसे भी अहल-ए-सियासत ने कर लिया इग़वाऔर इस के ब'अद वो सब कुछ हुआ जो होना था
डकैती क़त्ल इग़वा लूट और आतिश-ज़नीबहुत कुछ होता ही रहता है
ख़ुदा को बुरदा-फ़रोशों ने इग़वा कर लिया हैमैं ने पुलीस से राब्ता किया
अब यहाँ कोई नहीं कोई नहीं आएगा
है मौत इस क़दर क़रींमुझे न आएगा यक़ीं
ये वक़्त नहीं फिर आएगातुम अपनी करनी कर गुज़रो
दर्द आएगा दबे पाँव लिए सुर्ख़ चराग़वो जो इक दर्द धड़कता है कहीं दिल से परे
ये हसीं खेत फटा पड़ता है जौबन जिन का!किस लिए इन में फ़क़त भूक उगा करती है
और इस बेताबी का अगला क़दम सैलाब होता है
तुम आ के तिनके से मुझ को बाहर निकाल लेना''कोई नहीं आएगा ये कीड़े निकालने अब
जो बढ़ता है जो उगता हैवो दाना है या मेवा है
ख़ुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगाअपना अरमान बर-अफ़गन्दा-नक़ाब आएगा
मैं तिरे सामने अम्बार लगा दूँ लेकिनकौन से रंग का पत्थर तिरे काम आएगा
आओ कि जश्न-ए-मर्ग-ए-मोहब्बत मनाएँ हम!सोचा न था कि आएगा ये दिन भी फिर कभी
उसी कूचे में जहाँ चाँद उगा करते हैंशब-ए-तारीक गुज़ारूँगा, चला जाऊँगा
रेंगते वक़्त के मानिंद कभीलौट के आएगा हसन कूज़ा-गर-ए-सोख़्ता-जाँ भी शायद!
दिन निकल आएगाग़म न कर, ग़म न कर
जब भी गाएगी कोई ग़ैरत-ए-नाहीद ग़ज़लसब को आएगा नज़र शोला-ए-आवाज़ में तू
बेवफ़ाई की घड़ी, तर्क-ए-मदारात का वक़्तइस घड़ी अपने सिवा याद न आएगा कोई
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