आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "aabla-e-paa"
नज़्म के संबंधित परिणाम "aabla-e-paa"
नज़्म
गवाही जान दे के तू ने दी है हक़ की ज़ात पर
चलेंगे क़ाफ़िले तिरे निशान-ए-पा को देख कर
एस. ए. रहमान
नज़्म
तितलियाँ अपने परों पर पा के क़ाबू हर तरफ़
सेहन-ए-गुलशन की रविश पर रक़्स फ़रमाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
जिस में जुज़ सनअत-ए-ख़ून-ए-सर-ए-पा कुछ भी न था
दिल को ताबीर कोई और गवारा ही न थी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
जाम-ए-आतिश-ज़ेर-ए-पा की ओट ले कर साक़िया
बोतलों में डूब जाने का ज़माना आ गया
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
नज़्म
ख़िज़्र भी बे-दस्त-ओ-पा इल्यास भी बे-दस्त-ओ-पा
मेरे तूफ़ाँ यम-ब-यम दरिया-ब-दरिया जू-ब-जू
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हुजूम-ए-बे-सर-ओ-पा में कई सदियों से रहती है
गुज़रती है तो हर जानिब सुकूत-ए-मर्ग बहता है
फ़ैसल हाशमी
नज़्म
मैं निकाला जाऊँगा बे-दस्त-ओ-पा और सर खुला
''जितने अर्सा में मिरा लिपटा हुआ बिस्तर खुला''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
सुकून-ए-ख़ाब है बे-दस्त-ओ-पा ज़ईफ़ी का
तू इज़्तिराब है ख़ुद इज़्तिराब पैदा कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
लाहौर में देखा उसे मदफ़ूँ तह-ए-मर्क़द
गर्द-ए-कफ़-ए-पा जिस की कभी काहकशाँ थी