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नज़्म
तितलियाँ अपने परों पर पा के क़ाबू हर तरफ़
सेहन-ए-गुलशन की रविश पर रक़्स फ़रमाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
जिस में जुज़ सनअत-ए-ख़ून-ए-सर-ए-पा कुछ भी न था
दिल को ताबीर कोई और गवारा ही न थी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
जाम-ए-आतिश-ज़ेर-ए-पा की ओट ले कर साक़िया
बोतलों में डूब जाने का ज़माना आ गया
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
नज़्म
हुजूम-ए-बे-सर-ओ-पा में कई सदियों से रहती है
गुज़रती है तो हर जानिब सुकूत-ए-मर्ग बहता है
फ़ैसल हाशमी
नज़्म
घड़ी की सूइयों को रोकने से दौड़ता और हाँफता सूरज मिसाल-ए-नक़्श-ए-पा
अफ़्लाक पर जम जाएगा
जावेद अनवर
नज़्म
लाहौर में देखा उसे मदफ़ूँ तह-ए-मर्क़द
गर्द-ए-कफ़-ए-पा जिस की कभी काहकशाँ थी
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
नहीं मुमकिन मिटाना मुझ को मिस्ल-ए-नक़श-ए-पा यारो
ख़लाओं में रहूँगा गूँजता बन कर सदा यारो