aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aamna"
आमना और हव्वा है तूये धरती ये दुनिया तुझ से
महक को कभी अपना कर्तब दिखातीकभी बेबी नन्ना को पोयम सुनाती
ज़िंदगी वो सफ़ेद फूल है जिसेएक दोस्त दूसरे दोस्त को पेश करता है
न इतनी बे-तकल्लुफ़ीकि आइना हया करे
दिल तुझे दे भी गए अपना सिला ले भी गएआ के बैठे भी न थे और निकाले भी गए
और मैं जिस ने तुझे अपना मसीहा समझाएक ज़ख़्म और भी पहले की तरह सह जाऊँ
हर मुसलमाँ रग-ए-बातिल के लिए नश्तर थाउस के आईना-ए-हस्ती में अमल जौहर था
कल कोई मुझ को याद करे क्यूँ कोई मुझ को याद करेमसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे
अहद निभाने की ख़ातिर मत आनाअहद निभाने वाले अक्सर
इतना मालूम है ख़्वाबों का भरम टूट गया!
पानी को छू रही हो झुक झुक के गुल की टहनीजैसे हसीन कोई आईना देखता हो
लब पे हर्फ़-ए-ग़ज़ल दिल में क़िंदील-ए-ग़मअपना ग़म था गवाही तिरे हुस्न की
गुज़श्त-ए-वक़्त से पैमान है अपना अजब सा कुछसो इक मामूल है इमरान के घर का अजब सा कुछ
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है
'इक़बाल' कोई महरम अपना नहीं जहाँ मेंमालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा
इक बैर न इक मेहर न इक रब्त न रिश्तातेरा कोई अपना, न पराया कोई मेरा
ख़ून अपना हो या पराया होनस्ल-ए-आदम का ख़ून है आख़िर
दुनिया अम्न और ख़ुश-हाली के फूलों से सजाई जाएगीवो सुब्ह हमीं से आएगी
दयार-ए-इश्क़ में अपना मक़ाम पैदा करनया ज़माना नए सुब्ह ओ शाम पैदा कर
कभी फ़ुर्सत मिले तो फ़ातिहा पढ़ने चले आना
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