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नज़्म
असर ये भी है इक मेरे जुनून-ए-फ़ित्ना-सामाँ का
मिरा आईना-ए-दिल है क़ज़ा के राज़-दानों में
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
छेड़ा है साज़ हज़रत-ए-'साअदी' ने जिस जगह
उस बोस्ताँ के शोख़ अनादिल में हम भी हों
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ज़माने की हवा बदली उधर रंग-ए-चमन बदला
गुलों ने जब रविश बदली अनादिल ने वतन बदला
सय्यद तसलीम हैदर क़मर
नज़्म
अनादिल अब भी गाते हैं तरन्नुम अब भी होता है
जवानी अब भी हँसती है तकल्लुम अब भी होता है
शौकत परदेसी
नज़्म
ख़ुदा ने बहर-ए-उल्फ़त में तिरी उल्फ़त को खोया था
अनादिल भी बढ़े तेरी तरफ़ दामन को फैलाए
मयकश अकबराबादी
नज़्म
ज़मीं पर जाल फैलाया है कोसों ज़ुल्फ़-ए-सुम्बुल ने
अनादिल इन दिनों आते हुए गुलशन में डरते हैं
नज़्म तबातबाई
नज़्म
भरोसा क्या करें अहल-ए-गुलिस्ताँ लाला-ओ-गुल पर
अनादिल की ज़बान-ए-पुर-बयाँ कुछ और कहती है
रज़ी बदायुनी
नज़्म
चमन में हर तरफ़ थी जुस्तुजू गुल की अनादिल को
फ़क़त सय्याद को थी बद-गुमानी देखते जाओ
फ़ज़ल हक़ अज़ीमाबादी
नज़्म
क़लम को जो रवानी है मुसन्निफ़ के इशारों से
अनादिल को है जैसी उन्सियत रंगीं बहारों से