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नज़्म
लवों से जिन के चराग़ाँ हुई थी बज़्म-ए-हयात
जिन्हों ने हिन्द की तहज़ीब को ज़माना हुआ
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मगर हाँ बेंच के बदले उसे सोफ़े पे बिठला दे
यहाँ मेरे बजाए इक चमकती कार दिखला दे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
जानता हूँ मौत का हम-साज़ ओ हमदम कौन है
कौन है पर्वरदिगार-ए-बज़्म-ए-मातम कौन है