आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "batar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "batar"
नज़्म
नूर से कुछ इस तरह है चश्म तेरी तर-ब-तर
चाँदनी का अक्स जों उतरा हो सत्ह-ए-आब पर
जय राज सिंह झाला
नज़्म
कि तुम्हें आग की बारिश से तर-ब-तर न होने दें
सर्फ़-ओ-नहव का साएबान इतना बड़ा नहीं है
अहमद जावेद
नज़्म
मेरी ज़ुल्फ़ों में उलझी हुई रेशम से तर-ब-तर ये आँखें
कभी होंठ बन कर तुम्हारी साँसों की आहट को
दर्शिका वसानी
नज़्म
चौदहवीं की शब है लेकिन मातमी मल्बूस में लिपटी हुई है
चाँदनी भी आँसुओं में तर-ब-तर है
ख़ालिद मुबश्शिर
नज़्म
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लुथड़े हुए ख़ून में नहलाए हुए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल-नवाज़ी की