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नज़्म
बज़्म-ए-अंजुम की हर एक तनवीर धुँदली हो गई
रख दिया नाहीद ने झुँझला के हाथों से सितार
इब्न-ए-सफ़ी
नज़्म
जीते-जी जिस ने न होने दिया हम-बज़्म तुझे
गर्म उस से है तिरी बज़्म-ए-'अज़ा तेरे बा'द
बिस्मिल सईदी
नज़्म
सदा नाक़ूस की इक फ़ित्ना-ए-बेदार होती है
यहाँ बांग-ए-अज़ाँ मिर्रीख़ की फुन्कार होती है
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
सज्दा-रेज़ी के लिए इस रहगुज़र में ऐ जबीं
नक़्श-ए-पा-ए-दोस्त की तक़लीद होनी चाहिए
मयकश अकबराबादी
नज़्म
सज्दा-रेज़ी के लिए इस रहगुज़र में ऐ जबीं
नक़्श-ए-पा-ए-दोस्त की तक़लीद होनी चाहिए