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नज़्म
कोई बिरहन किसी की याद में आँसू बहाती हो
अगर ऐसे में तेरा दिल धड़क जाए तो आ जाना
राजेन्द्र नाथ रहबर
नज़्म
वाँ दूर कोह-ए-दिल की नम नम सी लकड़ियों का
ब्रिहन सा ख़ूब-सूरत चोटी पे इक मकाँ था
सलाहुद्दीन परवेज़
नज़्म
नोट गिनती हुई उँगलियाँ यूँ थिरकती हैं
जैसे तमन्नाओं को थपकियाँ दे शब-ए-हिज्र में एक ब्रिहन का दिल
ताबिश कमाल
नज़्म
सगान-ए-ख़ूक ज़ाद-ए-बर्ज़न ओ बाज़ार-ए-बे-मग़्ज़ी
मिरी जानिब अब अपने थोबड़े शाहाना करते हैं
जौन एलिया
नज़्म
क्या थाल कटोरी चाँदी की क्या पीतल की ढिबिया-ढकनी
क्या बर्तन सोने चाँदी के क्या मिट्टी की हंडिया चीनी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मैं ख़ुद मैं हसन कूज़ा-गर पा-ब-गिल ख़ाक-बर-सर बरहना
सर-ए-चाक ज़ोलीदा-मू सर-ब-ज़ानू
नून मीम राशिद
नज़्म
जिन्हें सहर निगल गई, वो ख़्वाब ढूँढता हूँ मैं
कहाँ गई वो नींद की, शराब ढूँढता हूँ मैं