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नज़्म
गया तो हम तुम्हें फ़ौरन बुला लेंगे चले जाओ''
(अगर मर जाऊँ मैं तो सब्र कर लेना... ख़ुदा-हाफ़िज़)
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
नज़्म
आज अपने हर हम-जोली को हम उल्लू ख़ूब बनाएँगे
अमजद चूनी और तुलसी को दावत पे बुलाया जाएगा