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नज़्म
चप्पे चप्पे पे हैं याँ गौहर-ए-यकता तह-ए-ख़ाक
दफ़्न होगा न कहीं इतना ख़ज़ाना हरगिज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
''मैं ने सब से अनमोल ख़्वाब तुम्हारी आँखों में सजाया था''
ये कह कर शब ने हर आँख में छापे मारे
मुनीर अहमद फ़िरदौस
नज़्म
प्रेम की ख़ुशबू चप्पे चप्पे में तुम को फैलाना है
सुन लो मेरी आँख के तारो ये एलान ज़रूरी है
अताउर्रहमान तारिक़
नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
मैं ने बिखरे हुए अल्फ़ाज़ को यकजा कर के
ज़ेहन को चाय के दो घूँट से बेदार किया
सय्यद अब्बास रज़ा तनवीर
नज़्म
मुझ से पहले कितने शा'इर आए और आ कर चले गए
कुछ आहें भर कर लौट गए कुछ नग़्मे गा कर चले गए