aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chuur"
जहाँ छुप गया पर्दा-ए-रंग मेंलहू की है गर्दिश रग-ए-संग में
हवा के दोश पे कुछ ऊदी ऊदी शक्लों कीनशे में चूर सी परछाइयाँ थिरकती हुई
पेङ़ा हर एक उस का है बर्फ़ी ओ मोती चूरहरगिज़ किसी तरह न बुझे पेट का तनूर
कहीं आबगीना ख़याल काकि जो कर्ब-ए-ज़ब्त से चूर था
मेहनत से ये माना चूर हैं हमआराम से कोसों दूर हैं हम
लज़्ज़त-ए-ख़्वाब से मख़मूर हवाएँ जागींजेल की ज़हर-भरी चूर सदाएँ जागीं
तुम अगर ग़मगीन हो मैं भी बहुत रंजूर हूँतुम थकन से चूर तो मैं भी थकन से चूर हूँ
वो बालक है आज भी हैराँ मेला जूँ-का-तूँ है लगाहैराँ है बाज़ार में चुप-चुप क्या क्या बिकता है सौदा
शमएँ बे-नूर हो गई हैंआईने चूर हो गए हैं
किसी ने दीदा-ओ-दिल के कँवल खिले पाएकिसी को साग़र-ए-एहसास चकना-चूर मिला
दरख़्तों के पत्ते भी चुप हो गएहवा थम गई पेड़ भी सो गए
हाए वो अश्क जो पलकों से ढलक भी न सकेज़िंदगी हुस्न-ओ-जवानी से अभी चूर सही
हुक़्क़े में थे बोर के लड्डूकुछ थे मोती-चूर के लड्डू
कि चकना-चूर हो जाऊँ
बाम-ओ-दर ख़ामुशी के बोझ से चूरआसमानों से जू-ए-दर्द रवाँ
जो खेल-कूद में दिन-रात चूर रहते थेहर एक खेल में शामिल ज़रूर रहते थे
लज़्ज़त-ए-शब से तिरा जिस्म अभी चूर सहीआ मिरी जान मेरे पास दरीचे के क़रीब
कोई सिपाह-ए-सितम पेशा चूर कर न सकीबशर की जागी हुई रूह के अयाग़ों को
जगह जगह गुर्ज़ वक़्त के चूर हो गए हैंजगह जगह ढेर हो गई हैं अज़ीम सदियाँ
बच्चों की हँसती आँखों केजो आइने चकना-चूर हुए
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