aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "cycle"
क्या ज़िंदगी हमारीसब कुछ है अपने बस मेंआज़ाद हैं फ़ज़ाएँदुनिया है दस्तरस मेंक्या क्या हमें मिला हैकुछ वक़्त कुछ बरस मेंलेकिन जो मुड़ के देखेंथी इक अजब कहानीदुश्वार कैसा जीनामुश्किल थी ज़िंदगानीइक आफ़त-ए-मुसलसलआलाम-ए-ना-गहानीरोज़ाना सुब्ह उठनाआसान था न इतनाहर रोज़ डाँट खानाहर रोज़ का सिसकनाहर बात के तमाशेहर बात पर झगड़नाअब्बा वहीं खड़े हैंअख़बार पढ़ रहे हैंक्या काम हम को दे देंहर वक़्त सोचते हैंऔलाद को तो अपनीनौकर समझ रहे हैंअम्मी के सामने तोबिल्कुल न मुँह को खोलेंहम बद-तमीज़ ठहरेगो अच्छी बात बोलेंचुप-चाप ही रहें बसकितना भी ख़्वार हो लेंपानी बरस रहा हैपर दिल तरस रहा हैवो साइकल खड़ी हैमाँझा वहीं रखा हैकंचे यहाँ पड़े हैंबल्ला वहाँ खड़ा हैलेकिन नहीं हमें क्यालादे कमर पे बस्तास्कूल जा रहे हैंतारीख़ का है परचाअच्छा नहीं हुआ तोबस बंद जेब ख़र्चाउर्दू का काम पूराकल रात कर लिया थालेकिन हमें रियाज़ीबिल्कुल समझ न आयाअल्लाह के हैं बंदेहम से है वास्ता क्याअम्मी ने सिर्फ़ डाँटाबालों में तेल डालाभय्या ने सिर्फ़ झिड़काबाजी ने ख़ूब टालासब के लिए है जी मेंनफ़रत का एक जालाभय्या की साइकल कीकिस ने हवा निकालीहम को भला ख़बर क्याहर शख़्स है सवालीउस ने हमारी चिड़ियाउस दिन जो तोड़ डालीसच है बहुत सितम थागोया थे इक खिलौनाजैसे हो सब बराबरघर में न होना होनादेखा नहीं किसी नेछुप छुप हमारा रोनाअब हो गया है अपना हर चीज़ पर इजारासब अपनी ज़िम्मेदारीसब फ़ैसले हमारेहर चीज़ इख़्तियारीलेकिन वो बचपने की है याद प्यारी प्यारीक्या ज़िंदगी हमारीक्या ज़िंदगी हमारी
आज तो मेरे कपड़े भी पानी की तरह भारी हैंमौत का काजल आँखों में लगानाऔर आँखों में पट्टी बाँध कर तार पे साइकल चलानाएक जैसा अमल हैज़िंदा रहने का अमलमुर्दा ज़िंदगी की दरयूज़्गी सेअंगूर की तरह रंग बदल कर दो-आतिशा होनापिघली हुई मोम-बत्ती की रौशनी के आख़िरी वारकी तरह कारी होता हैबिल्ली अपने शिकार सेपहले खेलती है फिर खाती हैआज जब कि मेरे कपड़े पानी की तरह भारी हैंमेरी बिंती सुनोमुझ से खेलना बंद कर दोमुझे खा जाओ
सोच रहा हूँ क्या तोहफ़ा दूँशब के पेड़ से चाँद की टहनी तोड़ के लाऊँया सूरज की हँसती हुई सी पैंटिंग ला कर तुम्हें हँसाऊँया नूरी बरसों से आगे ढूँड के लाऊँ नया सितारानीला नीला हरा समुंदर पैक करवा दूँरंग-बिरंगे पथरों वाला लाऊँ किनाराढूँड निकालूँ गहरे समुंदर से कोई नायाब ख़ज़ानाया गूगल पर सर्च करूँ मैं हैप्पी बर्थ-डे वाला गानाया ऑफ़िस से वापसी पर ले आऊँ खिलौनों-भरी दूकानया कोई हीरा या कोई मोती या कोई मरजानई एफ़ यू की इंशोरंस पॉलीसी ले लूँ बीस बरस कीया फिर पोर्ट ग्रांड का गेमिंग ज़ोन उठा कर घर ले आऊँया दो पहियों वाली साइकल पूँ पूँ करने वाली साइकलया छोटी सी प्यारी सी इक गुड़िया लाऊँ और अपनी गुड़िया को थमाऊँसोच रहा हूँ क्या तोहफ़ा दूँ
सुब्ह-दम जो देखा थाक्या हरा-भरा घर थाडाँटती हुई बीवीभागते हुए बच्चेरस्सियों की बाँहों मेंझूलते हुए कपड़ेबोलते हुए बर्तनजागते हुए चूल्हेइक तरफ़ को गुड़िया काअध-बना घरौंदा थादूर एक कोने मेंसाइकल का पहिया थामुर्ग़ियों के डरबे थेकाबुकें थीं, पिंजरा थातीस गज़ के आँगन मेंसब ही कुछ तो रक्खा था
काला हद से भी काला थाउतना काला जितनी तेरी सोचउतना काला जितनी तेरे दिल की कालककौन था कालाकाला काला सोचता जाताखुरच खुरच कर नोचता जाताअपना होना खोजता जाताजुमलों की बदबू के अंदरअपनी ख़ुश्बू सूँघता जाताअपनी सिगरेट फूँकता जाताकाले की सिगरेट भी कालीकाले का गुर्दा भी कालाकाले की कुप्पी भी कालीकाले की चुस्की भी कालीकाले का हर कश भी कालाहर हर कश से लाल भभूकाकाले की आँखें भी कालीआँखों से गिरने वाले सब आँसू कालेऔर काली आँखों में दिखने वालीमुश्किल की दीवार भी कालीकाले की तो जीत भी काली हार भी कालीकाले के सब बल्ब भी कालेकाले की सब वायरिंग कालीवायरिंग वो जो अंदर अंदरसुलग सुलग करकाले की सारी सोचों कोऔर ख़्वाबों कोगला चुकी थीजला चुकी थीजब वो चलता तो लगता वो लहराता हैचलते चलते बल खाता हैगिर जाता हैकाला क्या थाकलंग का टीकाज़मीं का धब्बाकाला जिस की आग में जल कर राख हुआ थाकाले के अंदर की आग थीया थी वो बाहर की आगआग भी कालीधुआँ भी काला राख भी कालीआग से उठने वाला इक इक शोला कालाकाले की बेबसी भी कालीकाले की खुजली भी कालीकाले के सब फोड़े-फुंसी छाले कालेकाले को सब काला कहने वाले कालेइक दिन काली सड़क किनारेबंगाली के पान के केबिन की जाली को थामे कालाघूर रहा था आते जातेरंग-बिरंगे किरदारों कोरिक्शा मोटर साइकल और कारों कोइक लम्बी सी काली गाड़ीधुआँ उड़ातीचीख़ती और चिल्लाती गुज़रीगहरे काले बालों वाली गोरी बच्चीएक गली से भागती निकलीकाला भागाऔर गोरी बच्ची को पूरे ज़ोर से धक्का दे करकाली गाड़ी के धक्के को ख़ुद पर झेलाकाला जाते जाते सब से कैसा खेलागोरी बच्ची बच गई लेकिनकाला अपनी जाँ दे बैठापीले लाल गुलाबी चेहरेकाले की जानिब जब लपकेसब ने देखाकाले की आँखों में चीख़ रहा था एक सवालकाले के ज़ख़्मों से बहने वाला ख़ून था लाल
मुझे अच्छे लगते हैंबादल जब वो बरसते हैंऔर आँखें जिन में कोई भी बसेरा कर सकता हैबकरियाँ और बच्चेजो सड़क पार कर जाते हैंऔर नहीं देख पाते उस आहनी हाथ कोजो उन के तआ'क़ुब में दौड़ा चला आता हैमुझे अच्छे लगते हैंडाकिये के क़दम और इन्सोमनिया की चायऔर बुझी बत्ती का मोटर साइकलजो इशारा काटते हुएरात में रास्ता बनाता गुज़र जाता हैबाग़ी नींद दरख़्त और ख़्वाबजो इस बेदारी के मौसम में कहीं दिखाई नहीं देतेमुझे अच्छे लगते हैंफ़राग़त और दुख से भरे दिनऔर रातें जब दूर दूर तक बारिश होती हैऔर आबाई मकानों की वो शामजब बहनों को रुख़्सत किया जाता हैपहाड़ के पार के अँधियारे की जानिबआँसू और धुँद जिन में साफ़ देखा जा सकता हैऔर दिल जिन्हें निशाना बनाया जाता हैऔर मिट्टी जिस की जानिब हमें लौटना हैमुझे अच्छे लगते हैंदरीचे जिन से हवा गुज़रती हैदरवाज़े जो कभी बंद नहीं होतेऔर दोस्त जिन के कंधों पर हमेशा हाथ रखा जा सकता हैऔर तुमलपकते हुए हाथों और दुनिया के दरमियानक्या कुछ मौजूद है
यूँ टेढ़ी तिरछी आड़ीजैसे सड़क हो उन कीअपनी ही खेती-बाड़ीदो दोस्त पीछे बैठेदो चढ़ गए अगाड़ीये फट-फटी है कोईया भागती पहाड़ीफट फट फटाक कर केजब ये सड़क पे धाड़ीदाएँ को पहले घूमीफिर बाएँ सम्त ताड़ीइक बस से बच के निकलीइक साइकल पछाड़ीइक टैक्सी को रगड़ानंबर प्लेट उखाड़ीफ़ुटपाथ पर जो उछलीटकराया इक कबाड़ीफिर रोड़ पर उतर करमचवा दी भग-भगाड़ीवो चौक का सिपाहीरोकी थी जिस ने गाड़ीलो वो भी कूद भागाफाँदी बड़ी सी झाड़ीयूँ डगमगा के लड़केचाचू के सारे आड़ीदिखलाएँ जैसे सर्कसकुछ मस्ख़रे अनाड़ी
थमी हुई है देर से बारिशदेर से इक काग़ज़ की कश्तीतैर रही है पानी मेंकश्ती जिस काग़ज़ से बनी हैउस पर कोई फूल बना हैफूल जो इस दुनिया का नहीं हैदो चींटे कश्ती के मुसाफ़िर बने हुए हैंडग-मग डग-मगडग-मग डग-मगकाग़ज़ अब गलने भी लगा हैकश्ती साइड स्टैंड वाली इक साइकल जैसेएक तरफ़ को झुकी हुई हैएक भी झोंकाउस कश्ती पर एक क़यामत ला सकता है
एवन की वो साइकल छत पर पड़ी जंग खा रही हैअब कोई उस को ढोने वाला चाहिएअब वो किसी को नहीं ढो सकतीउस के बदले आम अमरूद भी नहीं ले सकते अबकाग़ज़ ले सकते हैं मगर हरे और लालउन काग़ज़ों से फिर डब्बे ख़रीद लेंगेआम अमरूद के जूस के शत-प्रतीशत वाले
मेरी बारहवें साल-गिरह परसब ने नवाज़ा तोहफ़े दे करअब्बा इक साइकल ले आएअम्मी ने लड्डू बनवाएदीदी ने कपड़े सिलवाएभय्या गेंद और बल्ला लाएहर इक कुछ न कुछ लाया थाइक तोहफ़ा था मास्टर जी कामास्टर जी लाए थे खिलौनासब से अलग सब से निरालाइक क़तार में तीन थे बंदरक्या ख़ूबी थी उन के अंदरइक था हाथ से आँखें मूँदेदूसरा मुँह पर हाथ था रक्खेऔर जो तीसरा बंदर देखाहाथ जो था कानों पर रक्खामास्टर जी से पूछा मैं नेकैसा खिलौना है क्या जानेकहने लगे लो ग़ौर से सुन लोपहले सुन लो फिर मुँह खोलोइक कहता है बुरा न देखोदूसरा बोले बुरा न बोलोऔर तीसरे का ये है कहनाबुरा किसी से कभी न सुननाक्यूँ भई कैसा है ये तोहफ़ाहै कि नहीं ये सब की पसंद कामास्टर जी की बातें सुन करमिली नसीहत साल-गिरह परख़ुश थे मेरे अम्मी अब्बातोहफ़ा देख के मास्टर जी का
गिरा पानी के नल से एक अण्डातो ख़रबूज़ा उठा फिर ले के डंडाफ़लक पर रेल तेज़ी से चली हैहवा देखो तो पानी से जली हैनदी में तैरता ख़रगोश देखातो मछली ने परों को ख़ूब सींखामिली चूहे के बिल से एक बिल्लीश्री कागा बने हैं शैख़ चिल्लीकबूतर से हुई कचवे की शादीतो भालू ने टमाटर को दुआ दीजलेबी तैरती पानी पे आईमज़े ले ले के भिंडी ख़ूब खाईमचाया शोर कुछ साँपों ने ऐसाचलाया बकरियों ने खोटा पैसागधे साइकल चलाए जा रहे थेमज़े से दूध मीठा खा रहे थेफ़लक पर उड़ रहा है एक हाथीमियाँ घोड़े चले हैं बन के साथीसर-ए-राह पिट गई च्यूँटी बिचारीगिलहरी बन गई अब तो शिकारीथपक कर मैं ने मीठे को जगायाअंधेरे में नमक तक गुनगुनायामज़े से घास बंदर खा रहे थेचबा कर पान कव्वे गा रहे थेअज़ाँ मकड़ी ने दी नद्दी पे जा करमियाँ मच्छर निकल आए नहा कर
पोस्ट-मैन की साइकल की घंटीमेरे दिल की धड़कनें बढ़ा देती हैख़त हाथ में आते हीउन की यादें भी साथ चलती आती हैएक मदहोश करने वाली लिफ़ाफ़े की ख़ुश्बूज़ेहन पर छा जाती हैसियाही की लिखावटउस की उँगलियों की छुवन याद दिलाती हैकाग़ज़ का खुरदुरा एहसासदिल को गुदगुदाता हैपत्र पर लिखा मज़मूनठण्ड की गर्म चाय सा गर्माता हैऐसे जाने कितने ख़त डाकिया लाता रहाऔर हर दीवाली पर इन्हीं ख़तों का इनआ'म पाता रहा
हामिद शाकिर और माइकलदेखो मेरी छोटी साइकलपेडल मारो उड़ जाती हैहैंडल मोड़ो मुड़ जाती हैब्रेक दबाओ तो रुकती हैब्रेक न दो तो लड़ जाती हैइक नन्ही सी घंटी भी हैचुप रहती है बजती भी हैसाइकल है ये कितनी प्यारीदेती है ये ख़ूब सवारी
ख़ात्मे से पहले अगर ख़त्म होना है तो समझ लो कि ख़ात्मा हो चुका हैसिलाई मशीन पर मेरी औरत की नींद में सोई गिरनामेरे मक़्सूम का वीराना हैहवास बहुत है क़िस्सों पर भारी हैंहवास जानते हैं कहा नहीं जानते हुए भी सभी जानते हैंकि दुनिया पैदा ही नहीं हुईजिस में भेड़िये न हों सिर्फ़ ख़रगोश रह रहे होंवो देखो वो कोई सफ़ेद ख़रगोश ही तो हैजो अभी अभी इस झाड़ी से उछल के इस झाड़ी तक गया हैमगर उस की सफ़ेदी में ठीक उस की गर्दन की जगहभेड़िये के दाँत लगने से गहरे ख़ून का मुक़द्दर लगा हैइस तरह मुक़द्दर को ख़ून के धब्बे में देखनाकहाँ की दुनिया हैक्या कभी ऐसा हुआ कि मौत ने अपनी ग़िज़ा में ख़ुद को खायाउस चित्रकार को बुला सको तो बुलाओज़रा जल्द बुलाओकि वो कहीं और नहीं होगाकैमिस्ट्री के शो'बे में होगाकि जहाँ रखे हुए हर रंग में उस के अपने कीमियाई आसेब का बसेरा हैहम किसी न किसी रंग को ख़ुद तारी होने की दावत देते हैंऔर इस के आसेब से अपनी जिल्द नुचवाते हैंशिरयानों को उधड़वाते हैंहर रंग में बसेरा करने वाले आसेब ने हमारी मोहब्बत ही तो खायाइस लिए तो मैं सोते अपने बेटे को नहीं जगाताकि वो हर रोज़ मोटर-साइकल में पेट्रोल की जगहअपने हिस्से की बेदारी और नींद दोनों को एक साथ डाल देता हैइस लिए में देर तक सोती अपनी बेटी को नहीं जगाताकि वो किचन में चाय बनाने की अबदियत को भीचाय की प्याली में उंडेल देती है
मुझ को भी ग़ुस्सा आता हैजब कोई साइकल वालाअगले पहिए सेकीचड़ की इक छाप मेरी पतलून पे दे देता हैजब कोई मोटर वालामेरे मुँह परमुड़ के के गड्ढों के गंदे पानी के छींटे दे देता हैजब कोई खुले हुए छाते की कमाई से सर में ठोका देता हैजब फ़ुटपाथ पेमेरे मुक़ाबिल चलने वालाऊँचे महलों के तकते तकते मुझ को धक्का देता हैमुझ को भी ग़ुस्सा आता हैलेकिन मैं तोसूखे बाज़ूउभरी पस्लीपिचके गाल और ख़ाली जेबेंदेख के अपनीचुप रहता हूँऔर मेरे ऊपर वाले नोकीले दाँत बिछर जाते हैंहोंटों से बाहर आते हैंनिचले होंट से पहुँच जाते हैंमेरा सारा ग़ुस्सा निचले होंट के ख़ूँ में थर्राता है
रवाँ हूँ मैंऔर इस रवानी मेंअहद-दर-अहद की जराहत-नुमा बसारत की ख़ाक का वो भँवर हैजिस मेंमिरे शब-ओ-रोज़ का गुबार-ए-सियहमिरे संग घूमता हैरवाँ हूँ मैंऔर ख़ुद पे और सब पे हँस रहा हूँकि मेरी मानिंद हम सभी वक़्त की खड़ी साइकल कागर्दिश-पज़ीर पहिया हैं ना-मसाफ़त-ए-नौ रू-गर्दांकि ना-रसाई के ख़िश्त-ख़ानों की चिमनियों से निकलने वालेहुरूफ़-ए-पसपा के सब धुएँ सर्फ़-ए-राएगाँ हैंये मेहवर-ए-ख़ाक क्या हैकिस गर्दिश-ए-मुअ'ल्लक़ का इस्तिआ'रा हैहम कहाँ हैंमैं हँस रहा हूँसफ़ेद-मू सिर पे कुहल-उम्री की बर्फ़ रक्खेकि आज मैं अपने अहद का और शहर का वो ज़मीर भी हूँजो आज और कल के मोड़ पर हैजो देखता और सोचता हैकि हम बुज़ुर्गान-ए-साहब-ए-इख़्तियार की उम्र-ख़ुर्दा दानिशखड़े सफ़र के असीर वक़्तों की कैसी ज़ंजीर बन गई हैकि जो हमारी सियह-शब ख़ाक से लिपट करसभी की तक़दीर बन गई हैजो आज से मिलने वाले कल की हर एक साअत पे हल्क़ा हल्क़ा उतर रही हैजो सोचता हैकि हम बुज़ुर्गान-ए-साहब-ए-इख़्तियार की आँख ख़ुद से कट करहमारी नौहा-गरी की आरास्ता शबीहों को कल के इम्कान के नशरों को कब पड़ेगीजो सोचता हैकि ये सलासिल की रात लम्बी हैऔर न जाने तुलू-ए-सुब्ह-ए-नजात कब होकि हम बुज़ुर्गान-ए-साहब-ए-इख़्तियार के फ़ैसले की साअतहमारे ख़्वाबों के साथ कब हो
पापा ने साइकल तो बिल्कुल नई दिलाईअब क्या है इस का हुलिया कैसे हुआ ये भाई
सड़क पर रेल तेज़ी से चली हैहवा देखो तो पानी से जली हैकहा मुर्ग़े ने ये गीदड़ से रो करमिरी मुर्ग़ी अभी उठी है सो करनदी में तैरता ख़रगोश देखातो मछली ने परों को ख़ूब सेंकाकबूतर से हुई कछवे की शादीतो भालू ने टमाटर को दुआ दीमचाया शोर कुछ साँपों ने ऐसाचलाया बकरों ने जो खोटा पैसाजलेबी तैरती पानी पे आतीमज़े ले ले के वो भिंडी ने खाईगधे साइकल चलाए जा रहे थेमज़े से दूध खाना खा रहे थेसर-ए-रह पिट गई च्यूँटी बिचारीगिलहरी बन गई अब तो शिकारीथपक कर मैं ने मीठे को जगायाअंधेरे में नमक ने गुनगुनायाफ़लक पर उड़ रहा था एक हाथीमियाँ घोड़े चले हैं बन के साथीअज़ाँ बकरी ने दी नद्दी पे जा करमियाँ मच्छर निकल आए नहा करमिली चूहे के बिल से एक बिल्लीश्री गा गा बने हैं शैख़ चिल्लीमज़े से घास बंदर खा रहा हैचबा कर पान कव्वा आ रहा हैगिरा पानी के नल से एक अण्डातो ख़रबूज़ा उठा फिर ले के डंडासदा ये ग़ैब से एक बार आईज़मीन-ओ-आसमाँ में है लड़ाई
अपने अपने ग़मों ने हमें कैसा शाकी किया हैमुझे अपने सेबों कोकल शाम से पहले हर हाल में बेचना हैकोई आएगा इंसाँ-नुमासाइकल पे घिसटता हुआजिस की क़िस्मत की रेखाओं मेंमुस्तक़िल तीरगी है वो मेरा निशानामिरे पेट ने जबउसूल-ओ-ज़वाबित का जामा उताराक़वाएद को फिर अपने दिल की गली से निकालामुझे क्या जो मस्जिद के मीनार पर अबमोहब्बत भरे फूल खिलते नहीं हैंसदा-ए-मुअज़्ज़िन की कमज़ोर दस्तकसमाअ'त के दर पर खड़ी हाँफती हैमुझे क्या मिरे घर का चूल्हा सवालीमिरा पेट ख़ालीमुझे अपने सेबों को हर हाल में बेचना हैवो इंसाँ-नुमा साइकल पे घिसटता हुआआ रहा है वो मेरा निशाना
हाँ वो गाली भी मिरे हिस्से कीमेरी ही तरह घर से निकलती है पुरानी साइकल पर बैठ करउसे भी ये नहीं मा'लूम होताकि वो किस मुँह पे थूकी जाएगी आजइधर मैं भी नहा धो करनिकल आता हूँ बाहरढूँढने वो मोड़ वो महफ़िलजहाँ टकराऊँगा उस सेकहीं ये मेरी ज़िम्मेदारियों में हैकि वो हालात पैदा कर सकूँजिस में किसी गाली से मेरे कान तक का रास्ता आसान हो जाएऔर ये सबइस तरह होता है मेरे साथकि सोचूँ तो 'अक़्ल हैरान हो जाए
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