आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dahaan"
नज़्म के संबंधित परिणाम "dahaan"
नज़्म
मंज़ूर था जो माँ की ज़ियारत का इंतिज़ाम
दामन से अश्क पोंछ के दिल से किया कलाम
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
दश्त के काम-ओ-दहन को दिन की तल्ख़ी से फ़राग़
दूर दरिया के किनारे धुँदले धुँदले से चराग़
जोश मलीहाबादी
नज़्म
'अहिल्याबाई' 'दमन' 'पदमिनी' ओ 'रज़िया' ने
यहीं के पेड़ों की शाख़ों में डाले थे झूले
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
कहा है किस ने हम अपने पियारे वतन में भी बे-वतन रहेंगे
ज़बान छिन जाएगी हमारे दहन से हम बे-सुख़न रहेंगे
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
पूछ लो इस से तुम्हारा नाम क्यूँ ताबिंदा है
'डायर'-ए-गुर्ग-ए-दहन-आलूद अब भी ज़िंदा है
जोश मलीहाबादी
नज़्म
ख़्वाब ज़ख़्मी हैं उमंगों के कलेजे छलनी
मेरे दामन में हैं ज़ख़्मों के दहकते हुए फूल
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
कितने ही हम से रूप के रसिया आए यहाँ और चल भी दिए
तुम हो कि इतने हुस्न के होते एक न दामन थाम सके
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
अब्र-ए-रहमत दामन-अज़-गलज़ार-ए-मन बर्चीद-ओ-रफ़त
अंदकै बर-ग़ुंचा हाए आरज़ू बारीद-ओ-रफ़्त
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वही है शौक़-ए-नौ-ब-नौ, वही जमाल-ए-रंग-रंग
मगर वो इस्मत-ए-नज़र, तहारत-ए-लब-ओ-दहन