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नज़्म
रक़्साँ चला गया न ग़ज़ल-ख़्वाँ चला गया
सोज़-ओ-गुदाज़ ओ दर्द में ग़लताँ चला गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तू ऐ गाँधी 'इलाज-ए-दर्द-ए-इंसाँ बन के आया था
अँधेरी रात में सुब्ह-ए-दरख़्शाँ बन के आया था
जाफ़र मलीहाबादी
नज़्म
शिद्दत-ए-दर्द-ओ-अलम से जब भी घबराता हूँ मैं
तेरे नग़्मों की घनी छाँव में आ जाता हूँ मैं
ओम प्रकाश बजाज
नज़्म
दर्द-ए-दिल सो भी चुका ढल भी चुका वस्ल का चाँद
अंजुम-ए-सुब्ह खिला ख़त्म हुआ शब का सफ़र
सोहन राही
नज़्म
मैं इस ख़याल में था बुझ चुकी है आतिश-ए-दर्द
भड़क रही थी मिरे दिल में जो ज़माने से