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नज़्म
क़िस्मत का सितम ही कम नहीं कुछ ये ताज़ा सितम ईजाद न कर
यूँ ज़ुल्म न कर बे-दाद न कर
अख़्तर शीरानी
नज़्म
गुड़गुड़ाती हुई पान की पीकों में वो दाद वो वाह वा
चंद दरवाज़ों पे लटके हुए बोसीदा से कुछ टाट के पर्दे
गुलज़ार
नज़्म
दीद तेरी आँख को उस हुस्न की मंज़ूर है
बन के सोज़-ए-ज़िंदगी हर शय में जो मस्तूर है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
क्यूँ दाद-ए-ग़म हमीं ने तलब की बुरा किया
हम से जहाँ में कुश्ता-ए-ग़म और क्या न थे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
यही दिन अहल-ए-दिल के वास्ते उम्मीद का दिन है
तुम्हारी दीद का दिन है हमारी ईद का दिन है
मजीद लाहौरी
नज़्म
वो जिस की दीद में लाखों मसर्रतें पिन्हाँ
वो हुस्न जिस की तमन्ना में जन्नतें पिन्हाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मैं ज़ेर-ए-साया-ए-उम्मीद जिस के बढ़ न सका
वो माँ मैं जिस से शरारत की दाद पा न सका
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
बीता दीद उम्मीद का मौसम ख़ाक उड़ती है आँखों में
कब भेजोगे दर्द का बादल कब बरखा बरसाओगे