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नज़्म
इस से पहले कि मिरे इश्क़ पर इल्ज़ाम धरो
देख लो हुस्न की फ़ितरत में तो कुछ झोल नहीं
प्रेम वारबर्टनी
नज़्म
हम पे वारफ़्तगी-ए-होश की तोहमत न धरो
हम कि रुम्माज़-ए-रुमूज़-ए-ग़म-ए-पिन्हानी हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
गुमाँ ये है भला में जुज़ गुमाँ क्या था गुमानों में
सुख़न ही क्या फ़सानों का धरा क्या है फ़सानों में
जौन एलिया
नज़्म
मेरे साए से डरो तुम मिरी क़ुर्बत से डरो
अपनी जुरअत की क़सम अब मेरी जुरअत से डरो