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नज़्म
ख़ुद अपने दिल का ख़ून फ़ज़ा में उछाल के
मज़मूँ लिखे हैं हम ने फ़िराक़ ओ विसाल के
शोरिश काश्मीरी
नज़्म
मिरी जाँ गो तुझे दिल से भुलाया जा नहीं सकता
मगर ये बात मैं अपनी ज़बाँ पर ला नहीं सकता
गोपाल मित्तल
नज़्म
ऐ ज़न-ए-नापाक फ़ित्रत-ए-पैकर-ए-मकर-ओ-रिया
दुश्मन-ए-मेहर-ओ-वफ़ा ग़ारत-गर-ए-शर्म-ओ-हया
माहिर-उल क़ादरी
नज़्म
आपस में लड़ भी लेते हैं जब आए इन को जोश
हँसते हैं इम्तिहान के दिन ये कुतुब-फ़रोश
प्रवाना रुदौलवी
नज़्म
वो जिस की दीद में लाखों मसर्रतें पिन्हाँ
वो हुस्न जिस की तमन्ना में जन्नतें पिन्हाँ