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नज़्म
मन के मंदिर को मुनव्वर करे नूर-ए-इस्लाम
का'बा-ए-दिल में रहे शाम-ओ-सहर राम का नाम
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
ज़िक्र मत हो कहीं जलते हुए ख़ियाम का बस
सिर्फ़ तारीख़ मैं चमके मिरा फ़रमान-ए-शही
इलियास बाबर आवान
नज़्म
दस्तूर-ए-अदालत के लिए उस का क़लम था
फ़रमान-ए-रेआ'या के लिए उस की ज़बाँ थी
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
'अक़्ल ना-फ़रमान-ए-हक़ 'इश्क़ ख़ालिक़ का मुती’
इक तो उस से कोसों दूर एक उस का राज़-दाँ
मक़सूद अहमद मक़सूद
नज़्म
महफ़िल-ए-ज़ीस्त पे फ़रमान-ए-क़ज़ा जारी है
शहर तो शहर है गाँव पे भी बम्बारी है