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नज़्म
हवा लहरों पे लिखती है तो पानी पर तहरीर करता है
कि हम फ़रज़ंद-ए-आदम की तरह सब नक़्श-गर हैं
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
ये दुनिया दावत-ए-दीदार है फ़रज़ंद-ए-आदम को
कि हर मस्तूर को बख़्शा गया है ज़ौक़-ए-उर्यानी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हक़-परस्ती के लिए जैसे वली उठते हैं
हिफ़्ज़-ए-दीं के लिए फ़रज़ंद-ए-'अली उठते हैं
गुलज़ार देहलवी
नज़्म
शाहबाज़ मेहतिर
नज़्म
ले गए तसलीस के फ़रज़ंद मीरास-ए-ख़लील
ख़िश्त-ए-बुनियाद-ए-कलीसा बन गई ख़ाक-ए-हिजाज़
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
यहाँ का ख़ालिद-ए-इरफ़ाँ वहाँ के 'राहत'-इंदोरी
निरे शायर हैं दोनों के सितारे एक जैसे हैं
खालिद इरफ़ान
नज़्म
मैं हूँ शायर मेहरबाँ है मुझ पे ख़ल्लाक़-ए-अज़ल
पेश करनी है मुझे महफ़िल में इक ताज़ा ग़ज़ल