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नज़्म
तुम्हारे क़ौम के बच्चों में है तालीम का फ़ुक़्दाँ
ये गुत्थी सख़्त पेचीदा है इस को जल्द सुलझाओ
अहमक़ फफूँदवी
नज़्म
मुझे ज़िंदगी का कोई तजरबा नहीं
शायद अपनी ग़लतियों को हँस कर भूलने के फ़ुक़्दान को तजरबा कहते हैं
ऐन रशीद
नज़्म
कि मुझ में ज़िया-बार किरनों का फ़ुक़्दान है
या रौशनी की तमाज़त को सहने का हामिल नहीं हूँ
यूसुफ़ तक़ी
नज़्म
क़ुव्वत-ए-फ़ैसला का इन में है शायद फ़ुक़्दान
अक़्ल-ओ-दानिश की जगह इन में है मौजूद जुनूँ
सलाम संदेलवी
नज़्म
जुनून-ए-'इश्क़ का फ़ुक़्दान क्यों हुआ इन में
जो इन के मन में सदाक़त नहीं तो कुछ भी नहीं
बासित जलीली
नज़्म
अख़्तर शीरानी
नज़्म
तू राज़-ए-कुन-फ़काँ है अपनी आँखों पर अयाँ हो जा
ख़ुदी का राज़-दाँ हो जा ख़ुदा का तर्जुमाँ हो जा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
फिर देखे हैं वो हिज्र के तपते हुए दिन भी
जब फ़िक्र-ए-दिल-ओ-जाँ में फ़ुग़ाँ भूल गई है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
सिलसिला-ए-रोज़-ओ-शब साज़-ए-अज़ल की फ़ुग़ाँ
जिस से दिखाती है ज़ात ज़ेर-ओ-बम-ए-मुम्किनात
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सिर्र-ए-आदम है ज़मीर-ए-कुन-फ़काँ है ज़िंदगी
ज़िंदगानी की हक़ीक़त कोहकन के दिल से पूछ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
उड़ा ली क़ुमरियों ने तूतियों ने अंदलीबों ने
चमन वालों ने मिल कर लूट ली तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ मेरी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
अब तक असर में डूबी नाक़ूस की फ़ुग़ाँ है
फ़िरदौस-ए-गोश अब तक कैफ़िय्यत-ए-अज़ाँ है