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नज़्म
नुक़रई कश्ती है अब बच्चों की इक काग़ज़ की नाव
वो मुनव्वर क़ुमक़ुमे भी हो गए हैं आज फ़्यूज़
सलाम मछली शहरी
नज़्म
व-लेकिन तुम से ऐ जाँ और कुछ राखी के गुल फूले
दिवानी बुलबुलें हों देख गुल चुनने लगीं तिनके