इक बेवफ़ा के नाम

ओवेस अहमद दौराँ

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ओवेस अहमद दौराँ

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    रोचक तथ्य

    Calcutta, 8th August 1958, Published: Shama, Delhi

    तेरे भी दिल में हूक सी उठ्ठे ख़ुदा करे

    तू भी हमारी याद में तड़पे ख़ुदा करे

    मजरूह हो बला से तिरे हुस्न का ग़ुरूर

    पर तुझ को चश्म-ए-शौक़ देखे ख़ुदा करे

    खो जाएँ तेरे हुस्न की रानाइयाँ तमाम

    तेरी अदा किसी को भाए ख़ुदा करे

    मेरी ही तरह कश्ती-ए-दिल हो तिरी तबाह

    तूफ़ान इतने ज़ोर का उठ्ठे ख़ुदा करे

    राहों के पेच-ओ-ख़म में रहे ता-हयात गुम

    मंज़िल तिरे क़रीब आए ख़ुदा करे

    ज़ुल्मत हो तू हो और तिरी रहगुज़ार हो

    दुनिया में तेरी सुब्ह फूटे ख़ुदा करे

    तुझ पर नशात-ओ-ऐश की रातें हराम हों

    मर जाएँ तेरे साज़ के नग़्मे ख़ुदा करे

    आएँ तेरे बाग़ में झोंके नसीम के

    तेरा गुल-ए-शबाब महके ख़ुदा करे

    हर लम्हा तेरी रूह को इक बे-कली सी हो

    और बे-कली में नींद आए ख़ुदा करे

    हो तेरे दिल में मेरी ख़लिश मेरी आरज़ू

    मेरे बग़ैर चैन आए ख़ुदा करे

    तू जा रही है बज़्म-ए-तरब में तो ख़ैर जा

    पर तेरा जी वहाँ भी बहले ख़ुदा करे

    अल-मुख़्तसर हों जितने सितम तुझ पे टूट जाएँ

    लेकिन ये रब्त-ए-ज़ीस्त टूटे ख़ुदा करे

    जो कुछ मैं कह गया हूँ जुनूँ में वो सब ग़लत

    तुझ पर कोई भी आँच आए ख़ुदा करे

    तू है मता-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र बेवफ़ा सही

    है रौशनी-ए-दाग़-ए-जिगर बेवफ़ा सही

    स्रोत :
    • पुस्तक : Lamhon Ki Aawaz (पृष्ठ 146)
    • रचनाकार : Owais Ahmad Dauran
    • प्रकाशन : label litho press Ramna Road Patna-4 (1974)
    • संस्करण : 1974

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