आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "fuzail"
नज़्म के संबंधित परिणाम "fuzail"
नज़्म
ता'मीर के रौशन चेहरे पर तख़रीब का बादल फैल गया
हर गाँव में वहशत नाच उठी हर शहर में जंगल फैल गया
साहिर लुधियानवी
नज़्म
रौशनियों की पीली किर्चें पूरब पच्छिम फैल गईं
तू ने किस शय के धोके में पत्थर पर दे पटका चाँद
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ये खुल गया मिरे बहलाने को थीं ये बातें
मिरा यक़ीं न रहा इन फ़ुज़ूल क़िस्सों पर
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
तिरे होंटों से निकले साँस की ख़ुश्बू
दर-ओ-दीवार से रस्ता बना कर सारे बर्र-ए-'आज़मों में फैल सकती है
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
तुम्हें गर चूम लूँ
तो मेरे होंटों पर उलूही आसमानी ना-चशीदा ज़ाइक़े यूँ फैल जाते हैं
रहमान फ़ारिस
नज़्म
क्या तवक़्क़ो उन से रक्खें फ़ेल जो होते रहे
नक़्ल कर के दाग़ को दामन से जो धोते रहे