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नज़्म
फूलों पे रक़्स और न बहारों पे रक़्स कर
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद में ख़ारों पे रक़्स कर
शकील बदायूनी
नज़्म
नर्म-रफ़्तारी हो वक़्त-ए-सैर-ए-गुलज़ार-ए-तरब
राह-ए-पुर-ख़ार-ए-अमल में गर्म-रफ़्तारी भी हो
अर्श मलसियानी
नज़्म
वो शालीमार की रंगीनियों में हुस्न का जादू
वो दुनिया-ए-शबाब-ओ-शेर वो गुलज़ार-ए-रंग-ओ-बू
मयकश अकबराबादी
नज़्म
'अक़्ल की नादिरा-कारी ने बहुत रुख़ बदले
सर्द होती ही नहीं आतिश-ए-गुलज़ार-ए-ख़लील
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
अब्र-ए-रहमत दामन-अज़-गलज़ार-ए-मन बर्चीद-ओ-रफ़त
अंदकै बर-ग़ुंचा हाए आरज़ू बारीद-ओ-रफ़्त
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
गुलज़ार-ए-मआ'नी की चहकती हुई बुलबुल
शाइ'र थी सुख़न-संज थी एजाज़-ए-बयाँ थी
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
मेरे गुलज़ार-ए-तसव्वुर में बहारें आ गईं
उन को फूलों में बसाने का ज़माना आ गया
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
नज़्म
क्या ख़बर थी कि उजड़ जाएगा गुलज़ार-ए-हयात
एक झोंके से हवा के न ये सामाँ होंगे
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
एक तस्वीर के दो रुख़ हैं जलाल और जमाल
वही गुलज़ार-ए-ख़लील और वही नार-ए-नमरूद