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दिल्ली

MORE BYगुलज़ार देहलवी

    रोचक तथ्य

    Dilli ki ik Shahr thaa aalam mein intikhaab

    दिल्ली कि इस जहाँ में अज़ीम-ओ-क़दीम है

    इल्म-ओ-फ़न-ओ-हुनर की सदा से नईम है

    अल्लाह इस की अज़्मत-ए-दीं का अलीम है

    तफ़्सीर-ए-दिल हदीस-ए-ख़ुदी का फ़हीम है

    गीता-पुरान के भी फ़साने में ज़िक्र है

    तारीख़ से भी क़ब्ल ज़माने में ज़िक्र है

    दिल्ली का पांडओं के तराने में ज़िक्र है

    इंदर-प्रस्थ तक के सजाने में ज़िक्र है

    दिल्ली सदा से मरकज़-ए-बज़्म-ए-शहाँ रही

    सम्राट चक्रवर्ती शाह-ए-जहाँ रही

    पीराना-साल हो के भी हर-दम जवाँ रही

    पच्चीस बार लुट के भी ये कहकशाँ रही

    मंगोल' शक कुषाण द्राविड़ कि हून हों

    वो आरिया अरब हों कि अहल-ए-फ़ुनून हूँ

    वैदिक हों बोध जैन कि अहल-ए-जुनून हूँ

    क़ौम-ए-अरब के हों कि मुसलमाँ के ख़ून हों

    दुनिया की कितनी नस्लों ने इस को सजाया है

    हर धर्म दीन ज़ात ने इस को बसाया है

    सारे-जहाँ में इश्क़ का मरकज़ रही सदा

    सारे-जहाँ में डंका इसी शहर का बजा

    बर्बादियों से आज बचाओ उसे रफ़ीक़

    'गुलज़ार'-ए-हिन्द फिर से बनाओ इसे रफ़ीक़

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