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नज़्म
बशर इबलीस को तज़्वीर-ए-नौ का दर्स देता है
मुज़य्यन है गुनाह-ए-गूना-गूं से हर परी-ख़ाना
बेबाक भोजपुरी
नज़्म
सो गई रास्ता तक तक के हर इक राहगुज़ार
अजनबी ख़ाक ने धुँदला दिए क़दमों के सुराग़