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नज़्म
और कहारों की आवाज़ बीबी हटो
अब के बारिश ने मेहंदी के पेड़ों की सारी हिना छीन ली है
मोहम्मद अनवर ख़ालिद
नज़्म
इस क़दर प्यार से ऐ जान-ए-जहाँ रक्खा है
दिल के रुख़्सार पे इस वक़्त तिरी याद ने हात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मनहूस समाजी ढाँचों में जब ज़ुल्म न पाले जाएँगे
जब हाथ न काटे जाएँगे जब सर न उछाले जाएँगे