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नज़्म
निकल कर जू-ए-नग़्मा ख़ुल्द-ज़ार-ए-माह-ओ-अंजुम से
फ़ज़ा की वुसअतों में है रवाँ आहिस्ता आहिस्ता
नून मीम राशिद
नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
नज़्म
साग़र निज़ामी
नज़्म
इसी से एक ज़र्रा रू-कश-ओ-मेहर-ओ-महा-ओ-अख़्तर
सदाक़त जीने मरने टूटने जुड़ने उलझने दर गुज़रने की
शफ़ीक़ फातिमा शेरा
नज़्म
होंटों पे फ़िदा रूह-ए-बहार-ओ-गुल-ओ-नसरीं
आँखों की चमक रू-कश-ए-बज़्म-ए-मह-ओ-परवीं
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
और हम करते रहे उम्र-ए-मह-ओ-साल के ज़ख़्मों का शुमार
कहकशाँ फीकी है कुछ देर का मेहमान है चाँद
महमूद अयाज़
नज़्म
तेरा चेहरा है कि तख़्लीक़-ए-मह-ओ-महर का राज़
तेरी आँखें हैं कि असरार-ए-दो-आलम जैसे