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नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तलाश-ए-हुस्न-ओ-मुदावा-ए-ज़ख़्म-ए-दिल के लिए
चुरा के लाए हैं दो-चार लम्हे दुनिया से
माहिर मरनसूर
नज़्म
सरसर-ए-बे-ए'तिदाली से गुरेज़ाँ फ़िक्र-ओ-फ़न
होश में था ता-दम-ए-आख़िर ज़मीर-ए-मो'तबर
अज़ीज़ तमन्नाई
नज़्म
मेरी चाहत ने दीवार-ओ-दर को घरौंदा किया
हुस्न-ए-तरतीब-ए-दुनिया-ओ-‘उक़्बा हूँ मैं
अब्दुर्राहमान वासिफ़
नज़्म
लब-ए-जू चाँदनी में वो सुहानी रात की सैरें
नज़र अब ढूँढती है तेरे हुस्न-ए-कैफ़-सामाँ को
धर्मपाल आक़िल
नज़्म
जो नीयत के फ़ुतूर को हुस्न-ए-ख़याल में
और नतीजे की अज़िय्यत को हुस्न-ए-अमल में बदल दे
मोहम्मद हनीफ़ रामे
नज़्म
ख़ुनुक वादी में तरन्नुम हो रमीदा जैसे
हर तरफ़ हुस्न-ए-तरब-ख़ेज़ का 'आलम था मगर