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नज़्म
परतव रोहिला
नज़्म
वो इल्म में अफ़लातून सुने वो शेर में तुलसीदास हुए
वो तीस बरस के होते हैं वो बी-ए एम-ए पास हुए
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तू कहाँ है ऐ कलीम-ए-ज़र्रा-ए-सीना-ए-इल्म!
थी तिरी मौज-ए-नफ़स बाद-ए-नशात-अफ़ज़ा-ए-इल्म
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द-अफ़्गन-ए-इल्म
किस के सर जाएगा अब बार-ए-गिरान-ए-उर्दू
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
निज़ाम-ए-तहसील-ए-इल्म बदला नया तसव्वुर अदब को बख़्शा
ललित-कलाओं को शांति के हसीन उन्वान से सजाया
रिफ़अत सरोश
नज़्म
हक़ीक़त का तक़ाज़ा है हो दिल को जुस्तुजू पहले
हुसूल-ए-मुद्दआ को चाहिए कुछ आरज़ू पहले
नारायण दास पूरी
नज़्म
बहार-ए-गुलशन-ए-अफ़राद-ए-‘आलम तंदुरुस्ती है
मुक़द्दम तंदुरुस्ती है मुक़द्दम तंदुरुस्ती है
उफ़ुक़ लखनवी
नज़्म
मोहब्बत जिस को फ़ानूस-ए-मसर्रत की ज़िया कहिए
मोहब्बत जिस को लफ़्ज़-ए-आम में लुत्फ़-ए-वफ़ा कहिए
ऋषि पटियालवी
नज़्म
तू हुसूल-ए-ज़र की ख़ातिर किस क़दर बेचैन है
कसब-ए-दौलत ज़िंदगी का तेरी नसबुलऐन है