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नज़्म
ता'मीर के रौशन चेहरे पर तख़रीब का बादल फैल गया
हर गाँव में वहशत नाच उठी हर शहर में जंगल फैल गया
साहिर लुधियानवी
नज़्म
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
दौलत के लिए जब औरत की इस्मत को न बेचा जाएगा
चाहत को न कुचला जाएगा ग़ैरत को न बेचा जाएगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
शहर-ए-ख़ूबाँ में गँवाई है जवानी मैं ने
ख़्वाब-गाहों में जगाई है जवानी मैं ने