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नज़्म
मिसाल-ए-बर्क़ तू गिरता है जान-ए-ना-शकेबा पर
गिरी थी जिस तरह बिजली कलीम-ए-तूर-ए-सीना पर
अमजद नजमी
नज़्म
नज़र के जादू से जिस्म पत्थर
नज़र के पुर-ताब नूर से कोह-ए-तूर-ए-सीना भी रेज़ा रेज़ा
एजाज़ फ़ारूक़ी
नज़्म
ज़िंदगी तदबीर-ए-दरमाँ के सिवा कुछ भी नहीं
एक पैहम काविश-ए-जाँ के सिवा कुछ भी नहीं
सिद्दीक़ कलीम
नज़्म
मिरी निगाहों में वक़अत है तूर-ए-सीना की
मिरी निगाहों में अज़्मत है अर्श-ए-आली की
क़ैसर अमरावतवी
नज़्म
ये ज़ालिम तीसरा पैग इक अक़ानीमी बिदायत है
उलूही हर्ज़ा-फ़रमाई का सिर्र-ए-तूर-ए-लुक्नत है
जौन एलिया
नज़्म
गोशा गोशा तेरा नूर-ए-अलम से मा'मूर है
ज़र्रा ज़र्रा हामिल-ए-नूर-ए-चराग़-ए-तूर है
अर्श मलसियानी
नज़्म
बेटा दीन-ओ-मज़हब को और उम्दा अख़्लाक़ को तुम
अम्मी जान सा प्यारा जानो लेकिन झूट और मक्र फ़रेब
अबु बक्र अब्बाद
नज़्म
हर एक क़ुमक़ुमा यहाँ चराग़-ए-कोह-ए-तूर है
हर इक फ़ज़ा पे रंग है हर एक सम्त नूर है