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नज़्म
इस्याँ को गरचे रहमत-ए-यज़्दाँ पे नाज़ है
रहमत को अफ़्व-ए-कसरत-ए-इस्याँ पे नाज़ है
नारायण दास पूरी
नज़्म
मैं जिसे कहता था घर वो आज तिफ़्ल-आबाद है
मेरी तन्हा जान है और कसरत-ए-औलाद है