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नज़्म
हाए वो पहली नज़र वो उस की आँखों के पयाम
वो लजा कर मुस्कुरा कर दस्त-ए-नाज़ुक से सलाम
हसरत जयपुरी
नज़्म
लज्जा से चूर लता निहुड़ाए सर मुस्काती है
हल्के से उस के दामन से दो-चार फूल टपक जाते हैं
सज्जाद ज़हीर
नज़्म
रूठ कर मन कर लजा कर मुस्कुरा कर नाज़ से
खींच दी तस्वीर हर जज़्बे की सौ अंदाज़ से
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
रात हँस हँस कर ये कहती है कि मय-ख़ाने में चल
फिर किसी शहनाज़-ए-लाला-रुख़ के काशाने में चल
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तुम्हें मुझ से जो नफ़रत है वही तो मेरी राहत है
मिरी जो भी अज़िय्यत है वही तो मेरी लज़्ज़त है