आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "laraz"
नज़्म के संबंधित परिणाम "laraz"
नज़्म
यही वो वहशत-सरा है जिस में दिलों की आँखें लरज़ रही हैं
सफ़ीर-ए-लैला तुम आज आए हो तो बताऊँ
अली अकबर नातिक़
नज़्म
लरज़ रहा है दम-ब-दम कमान आबरुओं का ख़म
कोई जब एक नाज़-ए-बे-नियाज़ से किताबचों पे खींचता चला गया
मजीद अमजद
नज़्म
फड़फड़ाते हुए बेकार लरज़ उठते हैं
मिरे आज़ा का तनाव मुझे जीने ही न देता था तड़प कर एक बार
मीराजी
नज़्म
किसे मालूम था मंज़िल ही मुझ से रूठ जाएगी
लरज़ कर टूट जाएँगे मिरी क़िस्मत के सय्यारे