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नज़्म
काले काग़ज़ की तहरीर रहने भी दो
आओ कुछ देर तो बैठ कर
रिश्ता-ए-लफ़्ज़-ओ-मा'नी की तज्दीद हो
अलक़मा शिबली
नज़्म
शाहिद-ए-मा'नी-ए-असरार-ए-ज़ुहूर-ए-क़ुदरत
सब पे रौशन था कि वो ख़ास था नूर-ए-क़ुदरत
बिस्मिल इलाहाबादी
नज़्म
गुलज़ार-ए-मआ'नी की चहकती हुई बुलबुल
शाइ'र थी सुख़न-संज थी एजाज़-ए-बयाँ थी
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
नज़्म
ज़ेब देता है लिबास-ए-नौ नए अंदाज़ में
तन बदन भी है मोअ'त्तर ये जमाल-ए-ईद है
निसार कुबरा अज़ीमाबादी
नज़्म
ज़ाद बूम-ए-अर्श रिफ़अत-आश्ना तेरी ख़ाक
'जोश' के ख़ुर्शीद-ए-मा'नी की ज़िया से ताबनाक
अर्श मलसियानी
नज़्म
तर-ज़बानी और ख़ामोशी की मुबहम गुफ़्तुगू
लफ़्ज़ ओ मअ'नी में तवाज़ुन की नहुफ़्ता आरज़ू