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नज़्म
ये फ़ल्सफ़ा-गर सदा-ओ-आहंग-ओ-हर्फ़-ओ-मा'नी को ज़ख़्म दे कर लहू का कच्चा खुरनड दाँतों से नोचते हैं
कामरान नफ़ीस
नज़्म
तहमतन यानी 'रुस्तम' था गिरामी 'साम' का वारिस
गिरामी 'साम' था सुल्ब-ए-नर-ए-'मानी' का ख़ुश-ज़ादा