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नज़्म
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जो मरहलों में साथ थे वो मंज़िलों पे छुट गए
जो रात में लुटे न थे वो दोपहर में लुट गए
आमिर उस्मानी
नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
राजा मेहदी अली ख़ाँ
नज़्म
ये वो जमुना है जहाँ ले ले के जल्वत के मज़े
लूटे हैं उश्शाक़ ने बरसों मोहब्बत के मज़े