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नज़्म
गर किताबें हो गईं मैली तो क्या पढ़ने का लुत्फ़
काम की चीज़ें हैं जो उन की हिफ़ाज़त चाहिए
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
चाँद क्यूँ अब्र की उस मैली सी गठरी में छुपा था
उस के छुपते ही अंधेरों के निकल आए थे नाख़ुन