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नज़्म
उस शाम मुझे मालूम हुआ जब बाप की खेती छिन जाए
ममता के सुनहरे ख़्वाबों की अनमोल निशानी बिकती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
निज़ाम-ए-शमस-ओ-क़मर में पयाम-ए-हिफ़्ज़-ए-हयात
ब-चश्म-ए-शाम-ओ-सहर मामता की शबनम सी
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
किस के चेहरे में तलाशूँ तेरे चेहरे की झलक
किस के आँचल में मिलेगी तेरी ममता की महक
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
ममता के होंटों पर जब चाँदी की मोहरें लगती हैं
माँ ख़ुद अपनी बेटी को कर देती है क़ुर्बान यहाँ
क़तील शिफ़ाई
नज़्म
जब आया मामता के लफ़्ज़ की सूरत में आया है
मिरी वीरान आँखों ने फिर ऐसा वक़्त भी देखा
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
नज़्म
मुझ को सीने से लगा कर ही उसे मिलता क़रार
वो सरापा मामता है और उस को क्या कहूँ
मुर्तजा साहिल तस्लीमी
नज़्म
तुम अमर हो तो लचकती टहनियों की मामता हो
तुम जवानी हो तबस्सुम हो मोहब्बत की लता हो