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नज़्म
अज़रा नक़वी
नज़्म
मेंडक राग सुना तो झींगुर दौड़े दौड़े आएँ
रंग-मंच पर आने से वो पीछे क्यों रह जाएँ
अब्दुर्रहीम नश्तर
नज़्म
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
मैं ने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ज़माना आया है बे-हिजाबी का आम दीदार-ए-यार होगा
सुकूत था पर्दा-दार जिस का वो राज़ अब आश्कार होगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
अपना हक़ माँग मगर उन के तआ'वुन से न माँग
जो तिरे हक़ का तसव्वुर ही फ़ना कर डालें