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नज़्म
हौसला रख मुंतज़िर रह मौसम-ए-गर्मा का फिर
बैन मत कर अब दिल-ए-नाकाम रुख़्सत हो गया
शाहीन इक़बाल असर
नज़्म
उस वक़्त कहाँ तू होता है जब मौसम-ए-गर्मा का सूरज
दोज़ख़ की तपिश भर देता है दरियाओं में कोहसारों में
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
दुनिया गर न घूमती तो ये मौसम-ए-गर्मा कैसे आता
बाग़ में फूलों की बहार सर्दियों में ही क्यों आती है
मसऊ़दा इमाम
नज़्म
ये लुत्फ़ देख देख कर ज़बाँ पे बार बार है
ये मौसम-ए-बहार है ये मौसम-ए-बहार है