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नज़्म
वो कैसे लोग होते हैं जिन्हें हम दोस्त कहते हैं
अकेले रास्ते पे जब मैं खो जाऊँ तो मिलते हैं
इरफ़ान अहमद मीर
नज़्म
तुम्हारी हर ग़ज़ल में मीर का अंदाज़ मिलता है
हर इक मिसरे से जैसे धीमी धीमी आँच उठती है
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
दुनिया की लम्बी राहों पर हम यूँ तो चलते जाते हैं
कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं जो याद हमेशा आते हैं