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नज़्म
न पूछ मुझ से वो राहत जो इज़्तिराब में है
तू मिस्ल-ए-अंजुम-ए-रख़्शाँ नहीं तो कुछ भी नहीं
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
क़ल्ब पर जिस के नुमायाँ नूर ओ ज़ुल्मत का निज़ाम
मुन्कशिफ़ जिस की फ़रासत पर मिज़ाज-ए-सुब्ह-ओ-शाम
जोश मलीहाबादी
नज़्म
गुलिस्तान-ए-अदब में जिस क़दर थे मुंतशिर जल्वे
मुनज़्ज़म कर चुकी है उन को मिस्ल-ए-जिस्म-ओ-जाँ उर्दू
अलम मुज़फ़्फ़र नगरी
नज़्म
एक दिन थी दोपहर की सख़्त गर्मी आश्कार
धूप की शिद्दत थी मिस्ल-ए-नार-ए-दोज़ख़ क़हर-बार
अब्दुल क़य्यूम ज़की औरंगाबादी
नज़्म
मिस्ल-ए-शमशीर-ए-'उर्यां रहा है हमेशा तुम्हारा क़लम
जोत लो हर्फ़-ए-इज़हार की खेतियाँ सुब्ह-दम
क़मर अब्बास क़मर
नज़्म
सितारों में ज़िया-अफ़रोज़ मिस्ल-ए-माह-ए-कामिल है
समझते हैं तुझे सालार अपना कारवाँ वाले
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
दो दिन रहे जो आ के जहाँ में तो खल गए
आख़िर को मिस्ल-ए-ख़ार-ए-चमन से निकल गए