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नज़्म
ख़बर देती है तहरीक-ए-हवा तबदील-ए-मौसम की
खिलेंगे और ही गुल ज़मज़मे बुलबुल के कम होंगे
अकबर इलाहाबादी
नज़्म
उसी के दम से सारा गुल्सिताँ फ़िरदौस-मंज़र था
चमन में इंहिसार-ए-मौसम-ए-गुल तक उसी पर था