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नज़्म
शुमाल-ए-जावेदाँ अपना शुमाल-ए-जावेदान-ए-जाँ
है अब भी अपनी पूँजी इक मलाल-ए-जावेदान-ए-जाँ
जौन एलिया
नज़्म
किया रिफ़अत की लज़्ज़त से न दिल को आश्ना तू ने
गुज़ारी उम्र पस्ती में मिसाल-ए-नक़्श-ए-पा तू ने
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मगर ये अनोखी निदा जिस पे गहरी थकन छा रही है
ये हर इक सदा को मिटाने की धमकी दिए जा रही है
मीराजी
नज़्म
बल्ली-मारां के मोहल्ले की वो पेचीदा दलीलों की सी गलियाँ
सामने टाल की नुक्कड़ पे बटेरों के क़सीदे
गुलज़ार
नज़्म
ने मजाल-ए-शिकवा है ने ताक़त-ए-गुफ़्तार है
ज़िंदगानी क्या है इक तोक़-ए-गुलू-अफ़्शार है