aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "mutakallim"
ऐ रूह-ए-बशर! तुझ से हैं दोनों मुतकल्लिमसब्ज़े की ख़मोशी है कि झरनों का है आहंग
जिस से दिल-ए-दरिया मुतलातिम नहीं होताऐ क़तरा-ए-नैसाँ वो सदफ़ क्या वो गुहर कया!
कब तक निगह-ए-यार न होगी मुतबस्सिमतू अपना हर अंदाज़ हरीफ़ाना बना दे
हक़ीक़त के जहाँ से कोई इस दुनिया में दर आएतो उस के होंट मुतबस्सिम हों शायद क़हक़हा उठ कर
मुतकब्बिर ओ जलील!हाँ तिरे नाम पढ़े और किया ज़ब्ह उसे
मुतरन्निम से रहेंगे ये हवा के गोशेजिन में ग़ल्तीदा है अब लहन-ए-तकल्लुम तेरा
सावन की सुनहरी झड़ी केमुतरन्निम क़तरों का रक़्स कुछ तलाशता है
छोटी छोटी चीज़ों और किताबों सेमुतरन्निम आवाज़ों से
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